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FAILURE REASONS IN PIG FARMING क्यों होते हैं पिग फार्म फेल

 क्या पिग फार्मिंग एक नुक्सान वाला व्यवसाय है ?


दोस्तों,
वैसे तो पिग फार्मिंग एक अच्छे प्रॉफिट को देने वाला व्यवसाय माना जाता है और भारत में पिग फार्म बहुत बड़े पैमाने पर शुरू हुए लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि पिग फार्म शुरू होने के डेढ़ से दो सालों के अंदर बंद भी बहुत बड़े पैमाने पर हुए है।  ऐसी स्थिति किसी एक राज्य में नहीं बल्कि लगभग उत्तर भारत के सभी राज्यों में देखि गई है। 

वैसे तो पिग्स की डिमांड और सप्लाई में जमीन आसमान का अंतर है आज 2021 में भी, लेकिन फिर भी इस सेक्टर में उतनी तरक्की नहीं हो सकी जिसकी उम्मीद लगाकर हम सभी लोग बैठे हुए थे। जब हमने अपने अनुभव और बहुत से किसान भाइयों से उनके अनुभव लिए तो पाया कि इस पिग फार्मिंग बिजनेस में असफलता के कई कारन रहे, जोकि विस्तार से नीचे बताये जा रहे हैं। 

इन बताये हुए कारणों को अगर कोई नया फार्मर अपने ध्यान में रखे तो वह शायद फेल नहीं होगा, 

पिग फार्मिंग में फेल होने के कारण 

(FAILURE REASONS OF PIG FARMING IN INDIA)

  1. गलत प्रोजेक्ट कॉस्ट। 
  2. पिग फार्मिंग को पार्ट टाइम बिजनेस समझना। 
  3. लेबर की समस्या। 
  4. इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियां। 
  5. सही ब्रीड का न मिल पाना और संतुलित फीड का न होना। 
  6. टीकाकरण की जानकारी का अभाव। 
  7. जानवरों को बेचने की समस्या। 

गलत प्रोजेक्ट कॉस्ट


 पिछले कई सालों में हमने देखा है कि कोई भी (लगभग 95%) नया फार्मर अपने नए प्रोजेक्ट की सही केलकुलेशन नहीं लगाता है वे अक्सर यही सोचते है कि पिग फार्म बहुत ही आसानी से लगाया जा सकता है बस थोड़ा सा बाड़ा बनाकर फार्म आसानी से शुरू हो जायेगा बस जो भी खर्चा होगा वह ब्रीड को खरीदने में ही होगा बाकि सभी इंतजाम तो बहुत ही ज्यादा आसान है , और अगर 20 मादाओं (दो यूनिट) से शुरुआत करने में सात से आठ लाख रुपये खर्च होंगे , जबकि ये कॅल्क्युलेशन सरासर गलत है। दो यूनिट के प्रोजेक्ट की सही केलकुलेशन मैंने नीचे दी है , आप इसे आसानी से समझ सकते हैं यदि समझने में किसी तरह की कोई समस्या हो तो आप हमें संपर्क कर सकते हैं। 


 
इस चार्ट से आप समझ सकते हैं की दो यूनिट का पिग फार्मिंग प्रोजेक्ट लगभग 29 लाख से 30 लाख के आसपास पहुँच जाता है। इस पूरी प्रोजेक्ट कॉस्ट में जमीन की कीमत नहीं लगाई गई है यहाँ ऐसा माना गया है की जमीन आपकी अपनी है अगर इसमें जमीन (एग्रीकल्चर लैंड) की खरीदने की कीमत कोई शामिल कर लिया जाय तो शायद यही उन्तीस लाख की कीमत 50 लाख तक कैसे पहुँच जाएगी आप आसानी से समझ सकते हैं। 

हमारी सलाह है प्रोजेक्ट की सही कीमत को जांचने की लिए आप जितनी मादाओं से फार्म शुरू कर रहे हैं उसमे कम से कम 1.5 लाख की गुना जरूर कर लें। 
जैसे की आप अगर 10 मादाओं से अपना प्रोजेक्ट शुरू कर रहे हैं तब....
  
                10 मादा X 1.50 लाख = 15 लाख 
                कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट    = 15 लाख  

पिग फार्मिंग को पार्ट टाइम बिजनेस समझना 

अधिकतर देखा गया है कि पिग फार्मिंग व्यवसाय में आने वाले नए लोग इस व्यवसाय को पार्ट टाइम व्यवसाय 
समझते हैं जबकि ऐसा बिलकुल भी नहीं है , यह व्यवसाय आपका पूरा समय मांगता है। जीवित जानवरों / पशुपालन का कोई भी व्यवसाय हो जैसे की पोल्ट्री, बकरा पालन, डेयरी व्यवसाय, फिशरी या शूकर पालन ये सभी काम आपका रोज का समय मांगते हैं। 
बहुत सारी ऐसी छोटी छोटी बातें / समस्यांए फार्म पर डैलयय बेसिस पर सामने आती रहती हैं जिनको आप ही सही तरीके से हेंडल कर पाते हैं।  मेरा मानना है की रोज की छोटी छोटी समस्याओं को आपका लेबर मैनेज नहीं कर सकता इसलिए ध्यान रखे कि इस पिग फार्मिंग  को आप अपनी जिम्मेदारी पर रखे। 
हमने कई नए किसानो को देखा है जो केवल शनिवार / रविवार को अपने फार्म पर विजिट करते हैं और उन्हें अपने फार्म से जिन फायदों की उम्मीद होती है वह उन्हें नहीं मिल पाती।  हाँ, अगर आप काम को एक या दो साल करने के बाद अच्छे से सीख चुके हैं तो ऐसी परिस्थिति में आप सप्ताह में काम से दो बार जाकर मैनेज कर सकते हैं और जरुरत होगी कि आप अपने फार्म को सीसीटीवी कैमरे से अपने स्मार्ट फोन पर देखते रहें और लेबर को जरुरत की हिसाब से गाइड करते रहें। 
लापरवाही मतलब बर्बादी 
                अगर आपका फार्म आपके घर से कही नजदीक ही है तो पूरा दिन फार्म पर न रूककर आप केवल फीडिंग के वक्त अपने फार्म पर रहें क्यूंकि इसी वक्त आपको अपने फार्म के किसी भी जानवर में यदि कोई कमी होगी तो नजर आएगी।  

लेबर की समस्या 

पिग फार्मिंग व्यवसाय में लेबर की समस्या भी बहुत आम देखी गई है कई बार ऐसे भी नए फार्मर होतेहोते हैं जो पूरी तरह से अपनी लेबर पर ही निर्भर होते हैं इस स्थिति में कई बार लेबर भी फार्म मालिक को फिजूल नखरे दिखाते हैं और कई बार तो किसी दूसरी जगह काम पर भी बिना बताये जाते हैं , इसलिए नए फार्मर चाहिए कि उसके पास रिजर्व में या तो लेबर उपलब्ध हो या फिर किसी अचानक लेबर के न होने की परिस्थिति में खुद भी काम कर सके। 
                  ध्यान रखने की बात यह है कि अगर संभव हो तो फार्म की लेबर दूसरे राज्यों की बुलानी चाहिए वो भी पुरे परिवार  के साथ जोकि आपके फ़ार्म पर अच्छे तरीके से रूककर काम करेंगे जबकि लोकल की लेबर अक्सर बहानेबाजी करके छुट्टियां करते रहते हैं। 


इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियां 

जानवर को स्वस्थ रखने के लिए चाहिए की उनके रहने सहने की जगह यानि उनका शेड सही होना चाहिए। पिग्स को सही और स्वस्थ रहने के लिए एक ऐसे शेड की जरुरत होती है जिसमे हवा की निकासी सही हो और धुप भी आती जाती रहती हो। इसके लिए दो तरीके के शेड भारत में आजकल बनाये जा रहे हैं। 

                                                   1 .  आधा खुला आधा ढका हुआ शेड

 
                                                                    2  पूरा ढका हुआ शेड 

इसलिए फार्म की डिजाइन हमेशा ऐसी बनानी चाहिए जिसमे जानवर भी अच्छे से रहें खुश रहें क्यूंकि जब जानवर स्ट्रेस में नहीं होगा तभ ही वह अच्छे से ग्रोथ करेगा। थोड़ा और जानकारी के लिए आप इस विडिओ को भी देख सकते हैं।  

                


अच्छी ब्रीड और संतुलित फीड का न मिल पाना 

सही ब्रीड/नस्ल और वैज्ञानिक आधार पर बनी हुई फीड ही फार्म की सफलता की कुंजी हैं इसलिए नए फार्मर को अपना काम शुरू करने से पहले किसी भी अच्छे ब्रीडर से अच्छी जानकारी जुटाकर अच्छी नस्ल की ही खरीद करनी चाहिए।  अपने अनुभवों के आधार पर हम मानते हैं कि लार्ज व्हाइट यॉर्कशायर , लेंडरेस और इनकी हाइब्रिड ऍफ़ 1 नस्ल ही सबसे बेहतर होती है। 



दूसरी सबसे महत्वपूर्ण चीज है संतुलित आहार , फीड मुख्यरूप से दो तरीके की होती हैं पहली ब्रीडर फीड और दूसरी फेटनर फीड। जिसकी जानकारी नीचे है। 

कई बार बहुत सारे नए फार्मर अपने पिग्स को कुछ भी खिला देने का सोचते हैं यह सोचकर कि यह तो सूअर है कुछ भी खा लेगा लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है अगर आप अपने फार्म को सफल बनाना चाहते हैं तो एकदम संतुलित आहार ही अपने जानवरों को खिलाएं। खली हरी सब्जियां या वेस्टेज खिलाकर आप कभी भी एक सफल फार्म नहीं चला सकते। इसलिए हमेशा अपने फार्म में साफ़ सफाई रखे और संतित पिग फीड ही अपने जानवरों को दें। 

ब्रीडर फीड 
        1. ब्रीडर फीड (प्रेग्नेंसी में )
        2. फेरोवर फीड (दूध पिलाते समय/ लेक्टेशन टाइम में )
फेटनिंग फीड :
        1.स्टार्टर पिग फीड 
        2. ग्रोवर पिग फीड  
        3. फिनिशर पिग फीड  

  1. स्टार्टर पिग फीड : यह फीड दूध से अलग हुए पिग्लेट्स जिन्हे विनर कहा जाता है उन्हें दी जाती है।  इस स्टार्टर फीड को दूध से अलग हटाने के बाद से लेकर ३० किलो के हो जाने तक खिलाया जाता है। अगर फीड वैज्ञानिक आधार पर सही और संतुलित फॉर्मूले पर बनाई गई हो तो इसका एफ सी आर 02:01 का आता है। 
स्टार्टर पिग फीड ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण फीड है यह एक हाई प्रोटीन हाई एनर्जी फीड होता है। 

2 . ग्रोवर पिग फीड : यह फीड लगभग ३० किलो के बच्चे को खिला शुरू किया जाता है और उसके 60 किलो बजन होने तक दिया जाता है।  अगर फीड वैज्ञानिक आधार पर सही और संतुलित फॉर्मूले पर बनाई गई हो तो इसका एफ सी आर 02:01 का आता है। 

3. फिनिशर पिग फीड : यह फीड लगभग 60 किलो के बच्चे को खिला शुरू किया जाता है और उसके 100  किलो बजन या फिर उसके बिकने तक दिया जाता है।  अगर फीड वैज्ञानिक आधार पर सही और संतुलित फॉर्मूले पर बनाई गई हो तो इसका एफ सी आर 02.5 - 3.0 :01 का आता है। 

फीडिंग कैसे दी जानी है, इसके लिए नीचे दिया हुआ चार्ट पढ़ें। 

 टीकाकरण / दवाइयों की सही जानकारी 

         सही समय पर टीकाकरण न करना भी फार्म के सफल न हो पाने का कारण है इसलिए सही समय पर किसी भी तरह की लापरवाही को दरकिनार करते हुए टीकाकरण कर देना चाहिए। कुछ दवाइयों और टीकाकरण जो कि समय पर करनी चाहिए की जानकारी नीचे दी गई है। 

  1. आयरन डोज (जन्म के चौथे दिन 1 एम एल + जन्म के ग्यारहवे दिन 2 एम एल)
  2. मल्टीविटामिन डोज (जन्म की पांचवे दिन 1 एम एल + जन्म के बारहवे दिन 2 एम एल)
  3. डीवॉर्मिंग (जन्म के 21 से 25 दिन के भीतर )
  4. स्वाइन फीवर (2 माह की उम्र में )
इसके अलावा सही जानकारी के लिए अपने डॉक्टर सलाह जरूर लेते रहें। 

जानवरों को बेचने की समस्या 

जानवरो को बेचने की वैसे तो मार्किट में कोई समस्या नहीं है समय पर फेटनिंग के जानवर आसानी से बिकते रहते हैं क्यूंकि भारतीय बाजार में पिग्स की डिमांड  सप्लाई में जमीन आसमान का अंतर है लेकिन अच्छा होगा कि आप काम से काम एक बार में 18 टन (लगभग 180 जानवर / बजन 100 किलो ) एकसाथ ही तैयार करें और भारत के सबसे बड़े बाजार नागालैंड , गुवाहाटी जैसे उत्तर पूर्व के शहरों में बेचें वहां आपको इनकी जानवरों की कीमत यहाँ उत्तर भारत से ज्यादा मिलती है। 


उत्तर पूर्व के राज्यों में आप जिन्दा जानवरो को ट्रक (रोड ) और ट्रेन के माध्यम से लेकर जा सकते हैं , इसकी जानकारी के लिए एक बार आपको असम , नागालैंड , दीमापुर , गुवाहाटी की तरग घूम आना चाहिए। 

अगर आप इन सभी बातो का ध्यान रखते हैं तो आप निश्चित  सफल किसान बनेंगे। दो यूनिट से पिग फार्म शुरू करने से आपको कितना फायदा होता है इसकी जानकारी  नीचे दे रहा हूँ , जरूर ध्यान से  स्टडी करें। 


 
ब्लॉग पढ़ने के लिए धन्यवाद , किसी और जानकारी के लिए आप हमें कॉल कर सकते हैं। 
मोबाईल - 09761491000 / 09758653000 





गौड़ एग्रो 
उत्तर प्रदेश 
क्यों होते हैं पिग फार्म फेल 



इस ब्लॉग की जानकारी हमारे अपने फार्म के अनुभवों के आधार पर बनाई गई है। किसी भी प्रकार से आप इसके इस्तेमाल के लिए बाध्य नहीं हैं, अपने विवेक का इस्तेमाल भी करें  अधिक जानकारी के लिए आप हमें संपर्क कर सकते हैं। 
















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