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Use of Moringa in Pig Feed

मोरिंगा / सहजन 

मोरिंगा को हम सभी मुनगा या फिर सहजन के नाम से भी जानते हैं , उत्तर भारत के राज्यों में इसे सहजन के नाम से ही जाना जाता है जबकि मध्य भारत के राज्य जैसे मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में इसे प्रायः मुनगा  के नाम से जाना जाता है।  इस पौधे को अगर संजीवनी बृक्ष के नाम से परिभाषित किया जाय तो भी कम न होगा। हमने देखा है कि दक्षिण भारत के अधिकतर राज्यों में इस पेड़ के पत्तियों और इसकी कच्ची फलिओं जिन्हे ड्रमस्टिक के नाम से भी जाना जाता है का प्रयोग अक्सर अपने खाने की सब्जियों के रूप में किया जाता है। 
जो लोग सहजन के गुणों के बारे में जानते हैं वे इसको जादुई बृक्ष कहते हैं , 

आप लोगों को अपनी पिग पिग फीड बनाते समय इस पेड़ की पत्तो का प्रयोग जरूर करना चाहिए। इसका इस्तेमाल आप नीचे लिखे तरीके से बहुत ही आसानी से कर सकते हैं। 
  1. सबसे पहले आप हरी पत्तियों को इकठ्ठा कर ले , और किसी भी छाया / शेड में उसे २ से ३ दिन के लिए सूखने दें।  ध्यान रहे कि धुप में न सुखायें। 
  2. सूखने के बाद पत्तियों को आप अपनी फीड में मिलाएं। 
  3. १०० किलो ड्राई फीड में ५ किलो हरी पत्ती से जितनी सुखी पत्तियां मिली हो मिला लें। 
  4. अगर आप हरी पत्तियों को ही सीधे अपने फीड में मिलाना चाहें तो ५ किलो हरी पत्ती सीधे १०० किलो राशन में मिलाकर अपने पिग फीड में खिलाएं। 
ऐसा करने से आपको अपनी फीड में किसी भी तरह का विटामिन मिनरल पाउडर / एमिनोएसिड या फिर किसी भी तरह का सप्लीमेंट पाउडर मिलाने की जरुरत नहीं रहेगी।



सहजन / मोरिंगा के फायदे और गुण 


  1.  सहजन के पत्तो को पिग फीड में ही नहीं बल्कि गाय , भैंस और बकरों की फीड में में भी मिला सकते हैं। इन पत्तियों को फीड में मिलाने से जानवर की ग्रोथ बहुत अच्छी होती है और गाय भैंसो की फीड में मिलाने से जानवर बहुत ही हेल्दी हो जाते हैं। 
  2. सहजन की पत्तियों में विटामिन गाजर से दस गुना ज्यादा होता है,। 
  3. सहजन की पत्तियों में प्रोटीन दही से दो गुना , पोटेशियम केले से पंद्रह गुना  होता है 
  4. सहजन की पत्तियों में विटामिन ई बादाम से बारह गुना ज्यादा पाया जाता है। 
  5. सहजन की पत्तियों में कैल्शियम दूध से सत्रह गुना ज्यादा होता है। 
  6. सहजन की पत्तियों का रास निकल कर अगर फसलों पर स्प्रे किया जय तो पैदावार में बढ़ोत्तरी भी होती होती है। 
  7. सहजन की पत्तियां ही नहीं बल्कि टहनिया,छाल , ड्रमस्टिक सब कुछ काम में आता है। इस पेड़ से निकलने वाली हर चीज बहुत काम की होती है। 
एक और महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यह पौधा एक साल के अंदर ही एक बड़ा पेड़ भी बन जाता है , पहली बार आपको इस पौधे के बीज लगाने पड़ेंगे उसके बाद आप अगर चाहें तो इसको कलम/टहनी से भी जमीन में लगा सकते हैं। 

 एक क्विंटल फीड में अगर ५ किलो हरी पत्तियां मिलाने से अगर हमारी फीड ३०० से ३५० रूपये तक सस्ती हो सकती है तो फिर हमें इसके बारे में गंभीरता से सोचना भी चाहिये  और अमल में भी लाना चाहिए। उत्तर भारत में सर्दियों के मौसम में बरसीम काफी बड़ी मात्रा में पैदा होती है जिसे काफी मात्रा में पिग फार्मर अपने जानवरो को खिलाते भी हैं। ठीक उसी तरह सहजन / मोरिंगा की बुवाई भी जमीन में करि जा सकती है , और हमें किसी भी तरह से सहजन की पत्तियों की कमी भी नहीं पड़ेगी। इसकी पैदावार करने के लिए आप एक निश्चित दुरी जैसे हर पाँचफुट की दुरी पर इसका बीज लगा सकते हैं और जब आपके पौधे तक़रीबन  दो दो फुट के हो जाएँ तो आप उन्हें काट सकते हैं , जिन पौधों को आपने कटा है बही पौधे अगली बार पांच से छह जगह से अपनी नई टहनियां निकालेगा और फिर इस तरह से आपकी सहजन की पत्तियों की कमी कभी नहीं होगी।  

सहजन / मोरिंगा की खेती 

 इसलिए दोस्तों अपनी फीड की कमसे कम ३ से ४ रु प्रति किलो की कीमत को काम करने के लिए आप अपनी फार्म के पास की जमीन में मोरिंगा / सहजन की खेती जरूर करें। किसी भी तरह की जानकारी के लिए आप हमें नीचे दिए हुए नंबर पर कॉल कर सकते हैं। 



ब्लॉग पढ़ने के लिए धन्यवाद , अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें। 






Gaur Agro
Distt. Bulandshahr (UP)
E-Mail - gauragro@gmail.com
Mobile : (+91-9761491000)


अभी इस ब्लॉग में केवल जो जानकारी दी गई है, जोकि हमारे अपने फार्म के अनुभवों के आधार पर बनाई गई है। किसी भी प्रकार से आप इसके इस्तेमाल के लिए बाध्य नहीं हैं, अपने विवेक का इस्तेमाल भी करें  अधिक जानकारी के लिए आप हमें संपर्क कर सकते हैं। 

Comments

  1. We use drumsticks in our veg regularly but this have so much benifit, I was not aware.

    Thank you

    ReplyDelete
  2. Yes,
    It's miracle thing we have on our earth.

    ReplyDelete

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