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How to start Pig Farm कैसे शुरू करें शूकर पालन / पिग फार्मिंग

कैसे शुरू करें शूकर पालन / पिग फार्मिंग  

दोस्तों ,
अगर आप आज की तारीख में पिग फार्मिंग / शूकर पालन को शुरू करना चाहते हैं तो आजका ब्लॉग आप ही के लिए है।  इस ब्लॉग में हम आपको यह बताने जा रहे हैं कि पिग फार्म की शुरुआत करते समय आप किन गलतियों को करने से बचें , कई बार पूरी जानकारी न हो पाने की बजह से भी बहुत सारे किसान भाइयो को बड़ा नुक्सान उठाना पड़ता है। 

नए पिग फार्म को शुरू करते वक्त जिन बातो का मुख्यरूप से ध्यान रखना चाहिए , निम्न हैं। 
  1. लीगल फॉर्मेलिटीज। 
  2. सही जगह का चुनाव करना। 
  3. सही शेड का निर्माण। 
  4. ड्रेनेज की व्यवस्था। 
  5. नस्ल का चुनाव। 
  6. राशन / फीड। 

१. लीगल फॉर्मेलिटीज ( जरुरी कागज़ात )

फार्म को शुरू करने से पहले आप अगर नीचे लिखे प्रमाण पत्र आदि बनवा लेते हैं तो आपको भविष्य में अनावश्यक परेशानियों को नहीं झेलना पड़ेगा। 
  • अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) [नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट] - यह प्रमाण पत्र आपकी जमीन जिस ग्राम पंचायत / नगर पंचायत / गाँव में आती होगी , वहां का प्रधान/सरपंच/चेयरमेन अपने लेटर हेड पर बनाकर देगा। 
  • प्रशिक्षण प्रमाण पत्र (शूकर पालन ट्रेनिंग सर्टिफिकेट) को अपने पास रखे , उसके लिए आप किसी भी मान्यता प्राप्त सरकारी प्रशिक्षण केंद्र से ट्रेनिंग ले लें। 
  • आपके फार्म के खुलने / होने की जानकारी अपने ब्लॉक के सरकारी डॉक्टर (पशुपालन विभाग ) को होनी चाहिए।  इसके लिए आवश्यक है कि आप एक लेटर लिखकर अपने  ब्लॉक के सरकारी डॉक्टर (पशुपालन विभाग ) को अपने फार्म पर आमंत्रित करें और उस लेटर की एक कॉपी अपने पास अटेस्ट करा कर अपने रिकॉर्ड में रखे और ब्लॉक के सरकारी डॉक्टर (पशुपालन विभाग ) की विजिट के कुछ फोटो भी अपने पास रिकॉर्ड में रखें। 
  • अपने जिले के सी वी ओ (चीफ वेटेनरी ऑफिसर) को भी एक बार अपने फार्म पर विजिट करवाएं और पहले की ही तरह रिकॉर्ड मेंटेन करें। 
  • यदि कोई भी सरकारी अधिकारी किसी भी विभाग के आपके फार्म पर आते हों तो आप रिकॉर्ड जरूर मेंटेन करें। 

२. सही जगह का चुनाव करना 

पिग फार्म शुरु करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण है फार्म के लिए सही जगह को चुनना। सही जगज को चुनने से हमारा यह मतलब है कि जिससे आप को काम शुरू करने के बाद भविष्य में किसी तरह की कोई परेशानी न आये।  अतः भाइयो नीचे लिखी बातों का ध्यान जरूर रखें 
  • आप जब अपना पिग फार्म शुरू करें तो यह जरूर देख लें की उस जमीन पर आवाजाही , ट्रक की लोडिंग अनलोडिंग के लिए रास्ता जरूर हो। 
  • जिस भी जमीन पर फार्म लगाया जा रहा हो , वहां वाटर लेबल (भू-जल स्तर) सही हो , क्यूंकि पिग फार्मिंग में पानी की जरुरत डेली बेसिस पर होती है। 
  • फार्म की जमीन आबादी से हटकर ही होनी चाहिए , क्यूंकि कई बार देखा गया है कि भारतीय ग्रामीण परिवेश में शूकर पालन का विरोध भी कर दिया जाता है जो की जमे हुए फार्म के लिए और उसके मालिक के लिए मुसीबत का सबब बन जाता है। 
  • जमीन की लेवलिंग सही होनी चाहिए। 
  • बरसात के दिनों में या बाढ़ आने की स्थिति में आपके फार्म में पानी का भराव न हो , इसके लिए आपके फार्म को जमीन से थोड़ा ऊंचाई पर ही होना चाहिए। कितनी ऊंचाई ठीक रहेगी यह आप अपने उस क्षेत्र के की जानकारी के बाद तय कर सकते हैं।  

सही शेड का निर्माण 

व्यावसायिक स्तर पर पिग फार्मिंग करने के लिए आप दो तरीके से शेड बना सकते हैं। 
  • आधा खुला आधा ढका हुआ शेड। [Half shaded and half covered shade] 

इस तरीके से बने हुए शेड कई मायनों में फायदेमंद होते हैं जैसे कि गर्मी के दिनों में जानवर आसानी से बहार आकर खुले में बैठ जाता है और सर्दियों और बरसात के दिनों में अंदर अपने पेन्स / कमरों में जाकर बैठ जाते हैं। छोटे बच्चो के लिए भी इस तरह का शेड काफी अच्छा रहता है क्यूंकि छोटी उम्र में उनकी सेहत अच्छी रखने के लिए धुप की जरुरत इस तरह के शेड में न आसानी से पूरी हो जाती है। 

  • पूरा ढका हुआ शेड।  [Fully covered shade]
इस तरह के फार्म से कई तरीके का फायदा होता है जैसे कि ज्यादा जगह का उपयोग होना। ऐसे फार्म आजकल काफी प्रचलन में हैं। इन फार्म्स में कम जगह में ज्यादा जानवरों की प्रोडक्शन ली जा सकती है। खास तौर पर ऐसे फार्म फेटनिंग प्रोडक्शन के लिए बहुत बेहतर सिद्ध हो सकते हैं।  

आपकी जानकारी के लिए यहाँ एक विडिओ दे रहा हूँ उसे देखकर भी आप काफी सही अंदाजा लगा सकते हैं। 

फुली कवर्ड शेड कैसे बनाया जाय आप नीचे दी हुई विडिओ को देखकर  हैं , इस फार्म की विडिओ को देखकर आप आसानी से समझ सकते हैं कि पूरा फार्म कवर्ड होने के बावजूद बहुत ही अच्छी तरह से हवादार भी है और धुप भी आसानी से फार्म में अंदर आ सकती है।  

सही ड्रेनेज की व्यवस्था [पानी की निकासी]

फार्म बनाते समय इस बात का बेहद गंभीरता से ध्यान रखा जाना चाहिए की फार्म में प्रयोग होने वाला पानी चाहे वह पीने के लिए हो या फिर साफ़ सफाई का किसी भी तरीके से फार्म के फर्श पर इकठ्ठा नहीं होना चाहिए।  इसके फार्म का फर्श हमेशा एक तरफ या बाहर की तरफ ढालू बनवाना चाहिए। 
फार्म में अगर किसी भी तरह का पानी अंदर रुकेगा तो वह पानी कई तरीके से जानवरो को नुक्सान पहुंचा सकता है जैसे की ;
  • सर्दियों में नए पैदा हुए बच्चो को सर्दी होना। 
  • फर्श पर फिसलन का बन जाना , जिससे न केवल छोटेबच्चों को नुक्सान होगा बल्कि बड़े जानवर भी फिसलकर घायल हो सकते है। 
  • पानी का ठहराव कई तरह की बीमारियों को शुरू करने का कारन भी बन सकता है। 

नस्ल का सही चुनाव (ब्रीड सलेक्शन)

अक्सर व्यावसायिक रूप से पिग फार्मिंग करने के लिए निम्न तीन या चार तरीके की नस्लों का चुनाव करना चाहिए। 
  • लार्ज व्हाइट यॉर्कशायर 
  • लैंडरेस 
  • हाइब्रिड ऍफ़ १ 
  • ड्यूरोक  
  • हैम्पशायर 
आमतौर पर फार्मर लार्ज व्हाइट यॉर्कशायर और लेंडरेस नस्ल को ही अपने फार्म पर रखने की प्राथमिकता देते हैं क्यूंकि अनुभव के आधार पर हमने भी ऐसा देखा है कि ये दोनों नस्लें सही समय में तेजी से ग्रोथ करती हैं जोकि लगभग माह में 100 किलो का शारीरिक बजन बढा लेते हैं  और प्रोडक्शन के हिसाब से भी इनका लिटर साइज़ भी दूसरी नस्लों की तुलना में ज्यादा होता है। 

उत्तर भारत के राज्यों के हिसाब से ही नहीं बल्कि ये नस्ले लगभग पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद करि जाती हैं, इसलिए हम भी आपको नए फार्म के लिए इन दोनों नस्लों के चुनाव का ही सुझाव देंगे। 

 


राशन / पिग फीड 

पिग फार्मिंग में मुख्य रूप से राशन / पिग फीड दो तरह की होती है जोकि निम्न है। 
  1. ब्रीडिंग फीड
  2. फेटनिंग फीड 


ब्रीडिंग फीड :  ब्रीडिंग फीड भी दो तरीके की होती है जिसकी जानकारी नीचे है 
  1. ब्रीडिंग फीड (गर्भावस्था के लिए)
  2. फेरोअर फीड (डिलीवरी के पिग्लेट्स को दूध पिलाते समय)                        

फेटनिंग फीड : फेटनिंग फीड तीन तरीके की होती है जिसकी जानकारी नीचे दी गई है 

  1. स्टार्टर पिग फीड : यह फीड दूध से अलग हुए पिग्लेट्स जिन्हे विनर कहा जाता है उन्हें दी जाती है।  इस स्टार्टर फीड को दूध से अलग हटाने के बाद से लेकर ३० किलो के हो जाने तक खिलाया जाता है। अगर फीड वैज्ञानिक आधार पर सही और संतुलित फॉर्मूले पर बनाई गई हो तो इसका एफ सी आर 02:01 का आता है।
  2. ग्रोवर पिग फीड : यह फीड लगभग ३० किलो के बच्चे को खिला शुरू किया जाता है और उसके 60 किलो बजन होने तक दिया जाता है।  अगर फीड वैज्ञानिक आधार पर सही और संतुलित फॉर्मूले पर बनाई गई हो तो इसका एफ सी आर 02:01 का आता है। 
  3. फिनिशर पिग फीड : यह फीड लगभग 60 किलो के बच्चे को खिला शुरू किया जाता है और उसके 100  किलो बजन या फिर उसके बिकने तक दिया जाता है।  अगर फीड वैज्ञानिक आधार पर सही और संतुलित फॉर्मूले पर बनाई गई हो तो इसका एफ सी आर 02.5 - 3.0 :01 का आता है। 
फीड बनाने की ज्यादा जानकारी के लिए आप इस लिंक पर क्लिक करें और खुद अपनी फीड बनाना सीखें। 

https://gauragro.blogspot.com/2019/07/best-pig-feed-formula.html


इन सभी जानकारी के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात है फार्म के प्रॉफिट की केलकुलेशन , जोकि मै नीचे बता रहा हूँ।  इस जानकारी को आप बहुत ध्यान से समझे। 

२० मादाओं (०२ यूनिट ) के प्रोजेक्ट की केलकुलेशन 

जब आप दो यूनिट यानि 20 मादा + 02 नर के साथ अपना प्रोजेक्ट शुरू करते हैं तो आपके पूरे प्रोजेक्ट की लागत लगभग 29 लाख के आस पास आती है जिसे आप नीचे दी हुई कैलकुलेशन से समझ सकते हैं, ये पूरी केलकुलेशन पुरे साल की हैं।  ये सारी  केलकुलेशन आज (मई 2021) की कीमतों के हिसाब से है जो की भविष्य में बदल सकती है।  



प्रॉफिट केलकुलेशन



तो इस तरह दो यूनिट से पिग फार्मिंग करने पर कोई भी किसान आसानी से लगभग 11 लाख रुपये सालाना कमा सकता है। 

किसी भी और जानकारी के लिए आप हमें कॉल कर सकते हैं। 
मोबाइल 09761491000 / 09758653000 


गौड़ एग्रो 
उत्तर प्रदेश 

अभी इस ब्लॉग की जानकारी हमारे अपने फार्म के अनुभवों के आधार पर बनाई गई है। किसी भी प्रकार से आप इसके इस्तेमाल के लिए बाध्य नहीं हैं, अपने विवेक का इस्तेमाल भी करें  अधिक जानकारी के लिए आप हमें संपर्क कर सकते हैं। 






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